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जब आप टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करते हैं, तो आपको 'रिकवरी कोड्स' दिए जाते हैं।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से मिले बैकअप कोड्स के साथ सही व्यवहार यह है कि उन्हें छाप लिया जाए या किसी पासवर्ड मैनेजर में सुरक्षित रूप से जमा कर दिया जाए, क्योंकि अगर वह फोन खो जाए जिस पर आपका ऑथेंटिकेटर ऐप चल रहा था, तो ये कोड्स ही आपके अकाउंट में वापस जाने की एकमात्र अतिरिक्त चाबी हैं — इनके बिना, वह एक डिवाइस खोना आपको हमेशा के लिए बाहर कर सकता है।
उन्हें तुरंत मिटा देना यह मान लेता है कि आप अपने प्रमाणीकरण-डिवाइस तक पहुंच कभी नहीं खोएंगे, जो एक आम और अप्रत्याशित दुर्घटना है, कोई दुर्लभ अपवाद नहीं, और उन्हें सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देना उनका पूरा मकसद ही खत्म कर देता है, उस आपातकालीन चाबी को किसी को भी सौंपकर जो सेंध लगाना चाहे।
खोए या रीसेट हुए फोन से अकाउंट-लॉकआउट लगभग उतनी ही बार होता है जितना असली हैकिंग की कोशिशें, यही वजह है कि सुरक्षा सलाह इन कोड्स को जारी होते ही जमा करने को उतना ही अहम मानती है जितना खुद 2FA सेट करना, न कि कोई वैकल्पिक बाद की सोच।
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यह कहावत इंटरनेट अर्थव्यवस्था की किस संरचना को दर्शाती है?वह सेटिंग कौन-सी है?मानक समाधान क्या है?'पार्सल पते में गड़बड़ी' वाले संदेश के लिंक पर टैप करने से पहले, फिशिंग की सबसे भरोसेमंद जांच क्या है?यह हमला क्या कहलाता है?विशेषज्ञ सबसे अच्छी सुरक्षा किसे कहते हैं?इसमें क्या कहा गया है?किसी कैफे के सार्वजनिक वाई-फाई पर, विशेषज्ञ किस गतिविधि से बचने की सलाह देते हैं?इसे न टालने का असली कारण क्या है?इसका नाम शाब्दिक रूप से पूछता है 'क्या मैं हैक हो गया?' यह क्या है?विशेषज्ञ परिवारों को क्या तैयार रखने की सलाह देते हैं?'क्विशिंग' (QR फिशिंग) पर सही प्रतिक्रिया क्या है?Quration — Quration AIQ